व्यक्ति के जीवन में उसके संतान से जुड़ी बाधाए जैसे उनकी संतान बात नहीं सुनता या फिर उसके साथ बुरा हो रहा है. या मंगल कार्य रुकते हैं, शादी में रुकावटे, शादी की बात बिगड़ना, ये पितृ दोष के लक्षण है.

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भाद्रपद की पूर्णिमा तिथि से शुरू होता है पितृपक्ष जो 15 दिनों तक चलता है. पितृ पक्ष के दौरान कौवे के रूप में पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं- ऐसा माना जाता है.

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16 दिनों तक चलने वाले दिनों के दौरान हम पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, पूजा, इत्यादि करते हैं.कौवों को भोजन कराया जाता है कौवों के माध्यम से पितरों तक भोजन पहुंच जाता है.

हर दिन पितरों के लिए पितृपक्ष में तर्पण करना चाहिए. आपको कुश, जौ, काला तिल और अक्षत् का उपयोग तर्पण के लिए करना चाहिए. पितरों से तर्पण करने के बाद प्रार्थना करें और गलतियों के लिए क्षमा मांगे.

Floral Pattern
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पितरों का पिंडदान और ब्राह्मण भोज का भोग लगाकर श्राद्ध करना चाहिए. ब्राह्मणों को आदरपूर्वक आमंत्रित करना चाहिए श्राद्ध में और पैर धोकर आसन पर बिठाना चा

सुबह स्नान के बाद पूर्णिमा के दिनभोजन की तैयारी करें. भोजन पांच भागों में करके ब्राह्मण भोज कराएं. ब्राह्मण भोज से पहले श्राद्ध के दिन पंचबली भोग लगाना जरूरी होता है.

पितरों को स्वर्गवास के  लिए गया में पुत्र के जाने तथा फल्गु नदी में स्पर्श करने मात्र से मिलता है. तिल संग समी पत्र के प्रमाण पिंड गया में देने से पितरों को अक्षयलोक प्राप्त होता है.

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पिंडदान करने से गया में अश्वमेध यज्ञ तथा कोटि तीर्थ का फल मिलता है. श्राद्ध करने वाले किसी भी काल में यहां पिंड दान कर सकते हैं. साथ पितरों की तृप्ति के लिए ,यहां ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है

माता सीता ने यहां तर्पण किया था. इस जगह  को मोक्ष स्थली भी कहा जाता है. माना जाता है कि गया में पितृदेव के रूप में विष्णु भगवान स्वयं निवास करते हैं.

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